Motivation Quote Hindi | Motivational Story In Hindi

 Motivation  Quote  Hindi | Motivational  Story  In Hindi




पढ़ाई पूरी करने के बाद एक छात्र किसी बड़ी कंपनी में नौकरी पाने की चाह में इंटरव्यू देने के लिए पहुंचा....


छात्र ने बड़ी आसानी से पहला इंटरव्यू पास कर लिया...


अब फाइनल इंटरव्यू

कंपनी के डायरेक्टर को लेना था...


और डायरेक्टर को ही तय

करना था कि उस छात्र को नौकरी पर रखा जाए या नहीं...


डायरेक्टर ने छात्र का सीवी (curricular vitae)  देखा और पाया  कि पढ़ाई के साथ- साथ यह  छात्र ईसी (extra curricular activities)  में भी हमेशा अव्वल रहा...


डायरेक्टर- "क्या तुम्हें  पढ़ाई के दौरान

कभी छात्रवृत्ति (scholarship)  मिली...?"


छात्र- "जी नहीं..."


डायरेक्टर- "इसका मतलब स्कूल-कॉलेज  की फीस तुम्हारे पिता अदा करते थे.."


छात्र- "जी हाँ , श्रीमान ।"


डायरेक्टर- "तुम्हारे पिताजी  क्या काम  करते  है?"


छात्र- "जी वो लोगों के कपड़े धोते हैं..."


यह सुनकर कंपनी के डायरेक्टर ने कहा- "ज़रा अपने हाथ तो दिखाना..."


छात्र के हाथ रेशम की तरह मुलायम और नाज़ुक थे...


डायरेक्टर- "क्या तुमने कभी  कपड़े धोने में अपने  पिताजी की मदद की...?"


छात्र- "जी नहीं, मेरे  पिता हमेशा यही चाहते थे 

कि मैं पढ़ाई  करूं और ज़्यादा से ज़्यादा किताबें

पढ़ूं...


हां , एक बात और, मेरे पिता बड़ी तेजी  से कपड़े धोते हैं..."


डायरेक्टर- "क्या मैं तुम्हें  एक काम कह सकता हूं...?"


छात्र- "जी, आदेश कीजिए..."


डायरेक्टर- "आज घर वापस जाने के बाद अपने पिताजी के हाथ धोना...

फिर कल सुबह मुझसे आकर मिलना..."


छात्र यह सुनकर प्रसन्न हो गया...

उसे लगा कि अब नौकरी  मिलना तो पक्का है,


तभी तो  डायरेक्टर ने कल फिर बुलाया है...


छात्र ने घर आकर खुशी-खुशी अपने पिता को ये सारी बातें बताईं और अपने हाथ दिखाने को कहा...


पिता को थोड़ी हैरानी हुई...

लेकिन फिर भी उसने बेटे

की इच्छा का मान करते हुए अपने दोनों हाथ उसके

हाथों में दे दिए...


छात्र ने पिता के हाथों को धीरे-धीरे धोना शुरू किया। कुछ देर में ही हाथ धोने के साथ ही उसकी आंखों से आंसू भी झर-झर बहने लगे...


पिता के हाथ रेगमाल (emery paper) की तरह सख्त और जगह-जगह से कटे हुए थे...


यहां तक कि जब भी वह  कटे के निशानों पर  पानी डालता, चुभन का अहसास

पिता के चेहरे पर साफ़ झलक जाता था...।


छात्र को ज़िंदगी में पहली बार एहसास हुआ कि ये

वही हाथ हैं जो रोज़ लोगों के कपड़े धो-धोकर उसके

लिए अच्छे खाने, कपड़ों और स्कूल की फीस का इंतज़ाम करते थे...


पिता के हाथ का हर छाला सबूत था उसके एकेडैमिक कैरियर की एक-एक

कामयाबी का...


पिता के हाथ धोने के बाद छात्र को पता ही नहीं चला कि उसने  उस दिन के बचे हुए सारे कपड़े भी एक-एक कर धो डाले...


उसके पिता रोकते ही रह गए , लेकिन छात्र अपनी धुन में कपड़े धोता चला गया...


उस रात बाप- बेटे ने काफ़ी देर तक बातें कीं ...


अगली सुबह छात्र फिर नौकरी  के लिए कंपनी के  डायरेक्टर के ऑफिस में था...


डायरेक्टर का सामना करते हुए छात्र की आंखें गीली थीं...


डायरेक्टर- "हूं , तो फिर कैसा रहा कल घर पर ?

क्या तुम अपना अनुभव मेरे साथ शेयर करना पसंद करोगे....?"


छात्र- " जी हाँ , श्रीमान कल मैंने जिंदगी का एक वास्तविक अनुभव सीखा...


नंबर एक... मैंने सीखा कि सराहना क्या होती है...

मेरे पिता न होते तो मैं पढ़ाई में इतनी आगे नहीं आ सकता था...


नंबर दो... पिता की मदद करने से मुझे पता चला कि किसी काम को करना कितना सख्त और मुश्किल होता है...


नंबर तीन.. . मैंने रिश्तों की अहमियत पहली बार

इतनी शिद्दत के साथ महसूस की..."


डायरेक्टर- "यही सब है जो मैं अपने मैनेजर में देखना चाहता हूं...


मैं यह नौकरी केवल उसे  देना चाहता हूं जो दूसरों की मदद की कद्र करे,

ऐसा व्यक्ति जो काम किए जाने के दौरान दूसरों की तकलीफ भी महसूस करे...


ऐसा शख्स जिसने

सिर्फ पैसे को ही जीवन का ध्येय न बना रखा हो...


मुबारक हो, तुम इस नौकरी  के पूरे हक़दार हो..."


आप अपने बच्चों को बड़ा मकान दें, बढ़िया खाना दें,

बड़ा टीवी, मोबाइल, कंप्यूटर सब कुछ दें...


लेकिन साथ ही  अपने बच्चों को यह अनुभव भी हासिल करने दें कि उन्हें पता चले कि घास काटते हुए कैसा लगता है ?


उन्हें  भी अपने हाथों से ये  काम करने दें...


खाने के बाद कभी बर्तनों को धोने का अनुभव भी अपने साथ घर के सब बच्चों को मिलकर करने दें...


ऐसा इसलिए

नहीं कि आप मेड पर पैसा खर्च नहीं कर सकते,

बल्कि इसलिए कि आप अपने बच्चों से सही प्यार करते हैं...


आप उन्हें समझाते हैं कि पिता कितने भी अमीर

क्यों न हो, एक दिन उनके बाल सफेद होने ही हैं...


सबसे अहम हैं आप के बच्चे  किसी काम को करने

की कोशिश की कद्र करना सीखें...


एक दूसरे का हाथ

बंटाते हुए काम करने का जज्ब़ा अपने अंदर 

लाएं...


यही है सबसे बड़ी सीख..............


 उक्त कहानी यदि पसंद आई हो तो अपने परिवार में सुना जीएँ और अपने बच्चों को सर्वोच्च शिक्षा प्रदान कराये


आँखे बन्द करके जो प्रेम करे वो 'प्रेमिका' है।

आँखे खोल के जो प्रेम करे वो 'दोस्त' है।

आँखे दिखाके जो प्रेम करे वो 'पत्नी' है।

अपनी आँखे बंद होने तक जो प्रेम करे वो 'माँ' है।

परन्तु आँखों में प्रेम न जताते हुये भी जो प्रेम करे वो 'पिता' है।

 दिल से पढ़ो और ग़ौर करो

💓💞💕💓💗💓💕💖


👏👏👏👏👏👏👏🙌कृपया इस खूबसूरत संदेश हर दिल अज़ीज़ के साथ शेयर करें🙏

*✍🏻घर को औरत ही गढ़ती है✍🏻*


एक गांव में एक जमींदार था। उसके कई नौकरों में जग्गू भी था। गांव से लगी बस्ती में, बाकी मजदूरों के साथ जग्गू भी अपने पांच लड़कों के साथ रहता था। जग्गू की पत्नी बहुत पहले गुजर गई थी। एक झोंपड़े में वह बच्चों को पाल रहा था। बच्चे बड़े होते गये और जमींदार के घर
नौकरी में लगते गये।

सब मजदूरों को शाम को मजूरी मिलती। जग्गू और उसके लड़के चना और गुड़ लेते थे। चना भून कर गुड़ के साथ खा लेते थे।
बस्ती वालों ने जग्गू को बड़े लड़के की शादी कर देने की सलाह दी।

उसकी शादी हो गई और कुछ दिन बाद गौना भी आ गया। उस दिन जग्गू की झोंपड़ी के सामने बड़ी बमचक मची। बहुत लोग इकठ्ठा हुये नई बहू देखने को। फिर धीरे धीरे भीड़ छंटी। आदमी काम पर चले गये। औरतें अपने अपने घर। जाते जाते एक बुढ़िया बहू से कहती गई – पास ही घर है। किसी चीज की जरूरत हो तो संकोच मत करना, आ जाना लेने।

सबके जाने के बाद बहू ने घूंघट उठा कर अपनी ससुराल को देखा तो उसका कलेजा मुंह को आ गया।जर्जर सी झोंपड़ी, खूंटी पर टंगी कुछ पोटलियां और झोंपड़ी के बाहर बने छः चूल्हे (जग्गू और उसके सभी बच्चे अलग अलग चना भूनते थे)। बहू का मन हुआ कि उठे और सरपट अपने गांव भाग चले।

पर अचानक उसे सोच कर धचका लगा– वहां कौन से नूर गड़े हैं। मां है नहीं। भाई भौजाई के राज में नौकरानी जैसी जिंदगी ही तो गुजारनी होगी। यह सोचते हुये वह बुक्का फाड़ रोने लगी। रोते-रोते थक कर शान्त हुई। मन में कुछ सोचा। पड़ोसन के घर जा कर पूछा –
अम्मां एक झाड़ू मिलेगा? बुढ़िया अम्मा ने झाड़ू, गोबर और मिट्टी दी।साथ मेंअपनी पोती को भेज दिया।

वापस आ कर बहू ने
एक चूल्हा छोड़ बाकी फोड़ दिये।सफाई कर गोबर-मिट्टी से झोंपड़ीऔर दुआर लीपा।फिर उसने सभी पोटलियों के चने
एक साथ किये और अम्मा के घर जा कर चना पीसा।अम्मा ने उसे सागऔर चटनी भी दी। वापस आ कर बहू ने चने के आटे की रोटियां बनाई और इन्तजार करने लगी।

जग्गू और उसके लड़के जब लौटे तो एक ही चूल्हा देख भड़क गये।चिल्लाने
लगे कि इसने तो आते ही सत्यानाश कर दिया। अपने आदमी का छोड़ बाकी सब का चूल्हा फोड़ दिया। झगड़े की आवाज सुन बहू झोंपड़ी से  निकली। बोली –आप लोग हाथ मुंह धो कर बैठिये, मैं खाना
निकालती हूं। सब अचकचा गये! हाथ मुंह धो कर बैठे।

बहू ने पत्तल पर खाना परोसा – रोटी, साग, चटनी। मुद्दत बाद उन्हें ऐसा खाना मिला था। खा कर अपनी अपनी कथरी ले वे सोने चले गये।
सुबह काम पर जाते समय बहू ने उन्हें एक एक रोटी और गुड़ दिया।

चलते समय जग्गू से उसने पूछा – बाबूजी, मालिक आप लोगों को चना और गुड़ ही देता है क्या? जग्गू ने बताया कि मिलता तो सभी अन्न है पर वे चना-गुड़ ही लेते हैं।आसान रहता है खाने में। बहू ने समझाया कि सब
अलग अलग प्रकार का अनाज लिया करें। देवर ने बताया कि उसका काम लकड़ी चीरना है।

बहू ने उसे घर के ईंधन के लिये भी कुछ लकड़ी लाने को कहा।बहू सब की मजदूरी के अनाज से एक- एक मुठ्ठी अन्न अलग रखती। उससे बनिये की दुकान से बाकी जरूरत की चीजें लाती। जग्गू की गृहस्थी धड़ल्ले से चल पड़ी।

एक दिन सभी भाइयों और बाप ने तालाब की मिट्टी से झोंपड़ी के आगे बाड़ बनाया। बहू के गुण गांव में चर्चित होने लगे।जमींदार तक यह बात पंहुची। वह कभी कभी बस्ती में आया करता था।
आज वह जग्गू के घर उसकी बहू को आशीर्वाद देने आया।

बहू ने पैर छू
प्रणाम किया तो जमींदार ने उसे एक हार दिया। हार माथे से लगा बहू ने कहा कि मालिक यह हमारे किस काम आयेगा।

इससे अच्छा होता कि मालिक हमें चार लाठी जमीन दिये होते झोंपड़ी के दायें - बायें,तो एक कोठरी बन जाती। बहू की चतुराई पर जमींदार हंस पड़ा। बोला –
ठीक, जमीन तो जग्गू को मिलेगी ही।

यह हार तो तुम्हारा हुआ।
यह कहानी मैरी नानी मुझे सुनाती थीं।
फिर हमें सीख देती थीं –

8 मार्च अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏🙏🙏महिलाएं सिर्फ शक्ल


और ज़िस्म से ही खूबसूरत नहीं होती,,

*✍🏻घर को औरत ही गढ़ती है✍🏻*   एक गांव में एक जमींदार था। उसके कई नौकरों में जग्गू भी था। गांव से लगी बस्ती में, बाकी मजदूरों के साथ जग्गू भी अपने पांच लड़कों के साथ रहता था। जग्गू की पत्नी बहुत पहले गुजर गई थी। एक झोंपड़े में वह बच्चों को पाल रहा था। बच्चे बड़े होते गये और जमींदार के घर नौकरी में लगते गये।  सब मजदूरों को शाम को मजूरी मिलती। जग्गू और उसके लड़के चना और गुड़ लेते थे। चना भून कर गुड़ के साथ खा लेते थे। बस्ती वालों ने जग्गू को बड़े लड़के की शादी कर देने की सलाह दी।  उसकी शादी हो गई और कुछ दिन बाद गौना भी आ गया। उस दिन जग्गू की झोंपड़ी के सामने बड़ी बमचक मची। बहुत लोग इकठ्ठा हुये नई बहू देखने को। फिर धीरे धीरे भीड़ छंटी। आदमी काम पर चले गये। औरतें अपने अपने घर। जाते जाते एक बुढ़िया बहू से कहती गई – पास ही घर है। किसी चीज की जरूरत हो तो संकोच मत करना, आ जाना लेने।   सबके जाने के बाद बहू ने घूंघट उठा कर अपनी ससुराल को देखा तो उसका कलेजा मुंह को आ गया।जर्जर सी झोंपड़ी, खूंटी पर टंगी कुछ पोटलियां और झोंपड़ी के बाहर बने छः चूल्हे (जग्गू और उसके सभी बच्चे अलग अलग चना भूनते थे)। बहू का मन हुआ कि उठे और सरपट अपने गांव भाग चले।   पर अचानक उसे सोच कर धचका लगा– वहां कौन से नूर गड़े हैं। मां है नहीं। भाई भौजाई के राज में नौकरानी जैसी जिंदगी ही तो गुजारनी होगी। यह सोचते हुये वह बुक्का फाड़ रोने लगी। रोते-रोते थक कर शान्त हुई। मन में कुछ सोचा। पड़ोसन के घर जा कर पूछा – अम्मां एक झाड़ू मिलेगा? बुढ़िया अम्मा ने झाड़ू, गोबर और मिट्टी दी।साथ मेंअपनी पोती को भेज दिया।  वापस आ कर बहू ने एक चूल्हा छोड़ बाकी फोड़ दिये।सफाई कर गोबर-मिट्टी से झोंपड़ीऔर दुआर लीपा।फिर उसने सभी पोटलियों के चने एक साथ किये और अम्मा के घर जा कर चना पीसा।अम्मा ने उसे सागऔर चटनी भी दी। वापस आ कर बहू ने चने के आटे की रोटियां बनाई और इन्तजार करने लगी।  जग्गू और उसके लड़के जब लौटे तो एक ही चूल्हा देख भड़क गये।चिल्लाने लगे कि इसने तो आते ही सत्यानाश कर दिया। अपने आदमी का छोड़ बाकी सब का चूल्हा फोड़ दिया। झगड़े की आवाज सुन बहू झोंपड़ी से  निकली। बोली –आप लोग हाथ मुंह धो कर बैठिये, मैं खाना निकालती हूं। सब अचकचा गये! हाथ मुंह धो कर बैठे।   बहू ने पत्तल पर खाना परोसा – रोटी, साग, चटनी। मुद्दत बाद उन्हें ऐसा खाना मिला था। खा कर अपनी अपनी कथरी ले वे सोने चले गये। सुबह काम पर जाते समय बहू ने उन्हें एक एक रोटी और गुड़ दिया।  चलते समय जग्गू से उसने पूछा – बाबूजी, मालिक आप लोगों को चना और गुड़ ही देता है क्या? जग्गू ने बताया कि मिलता तो सभी अन्न है पर वे चना-गुड़ ही लेते हैं।आसान रहता है खाने में। बहू ने समझाया कि सब अलग अलग प्रकार का अनाज लिया करें। देवर ने बताया कि उसका काम लकड़ी चीरना है।   बहू ने उसे घर के ईंधन के लिये भी कुछ लकड़ी लाने को कहा।बहू सब की मजदूरी के अनाज से एक- एक मुठ्ठी अन्न अलग रखती। उससे बनिये की दुकान से बाकी जरूरत की चीजें लाती। जग्गू की गृहस्थी धड़ल्ले से चल पड़ी।   एक दिन सभी भाइयों और बाप ने तालाब की मिट्टी से झोंपड़ी के आगे बाड़ बनाया। बहू के गुण गांव में चर्चित होने लगे।जमींदार तक यह बात पंहुची। वह कभी कभी बस्ती में आया करता था। आज वह जग्गू के घर उसकी बहू को आशीर्वाद देने आया।   बहू ने पैर छू प्रणाम किया तो जमींदार ने उसे एक हार दिया। हार माथे से लगा बहू ने कहा कि मालिक यह हमारे किस काम आयेगा।   इससे अच्छा होता कि मालिक हमें चार लाठी जमीन दिये होते झोंपड़ी के दायें - बायें,तो एक कोठरी बन जाती। बहू की चतुराई पर जमींदार हंस पड़ा। बोला – ठीक, जमीन तो जग्गू को मिलेगी ही।   यह हार तो तुम्हारा हुआ। यह कहानी मैरी नानी मुझे सुनाती थीं।  फिर हमें सीख देती थीं –  8 मार्च अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏🙏🙏महिलाएं सिर्फ शक्ल  और ज़िस्म से ही खूबसूरत नहीं होती,, बल्कि वो इसलिए भी खूबसूरत होती हैं,। क्योंकि प्यार में ठुकराने के बाद भी ...  किसी लड़के पर तेजाब नहीं फेंकती !  उनकी वज़ह से कोई लड़का  दहेज़ में प्रताड़ित हो कर फांसी नहीं लगाता ! वो इसलिए भी खूबरसूरत होती हैं,, कि उनकी वजह से किसी लड़के को  रास्ता नही बदलना पड़ता!  वो राह चलते लड़को पर  अभद्र टिप्पड़ियां नही करती!  वो इसलिए भी खूबसूरत होती हैं,, कि देर से घर आने वाले पति पर  शक नही करती,, बल्कि फ़िक्र करती है!  वो छोटी छोटी बातों पर  गुस्सा नही होती,  सामान नही पटकती,  हाथ नही उठाती, बल्कि पार्टनर को समझाने की, भरपूर कोशिश करती हैं ! वो जुर्म सह कर भी  रिश्ते इसलिए निभा जाती हैं,, क्योंकि वो अपने बूढ़े माँ बाप का  दिल नही तोड़ना चाहती !  वो हालात से समझौता  इसलिए भी कर जाती हैं,  क्योंकि उन्हें अपने बच्चों के  उज्ज्वल भविष्य की फ़िक्र होती है !  वो रिश्तों में जीना चाहती हैं !  रिश्ते निभाना चाहती हैं !  रिश्तों को अपनाना चाहती हैं! दिलों को जीतना चाहती हैं !  प्यार पाना चाहती हैं !  प्यार देना चाहती हैं  औरत चाहे घर को स्वर्ग बना दे, चाहे नर्क!



बल्कि वो इसलिए भी खूबसूरत होती हैं,।


क्योंकि प्यार में ठुकराने के बाद भी ...


किसी लड़के पर तेजाब नहीं फेंकती !


उनकी वज़ह से कोई लड़का


दहेज़ में प्रताड़ित हो कर फांसी नहीं लगाता !


वो इसलिए भी खूबरसूरत होती हैं,,


कि उनकी वजह से किसी लड़के को


रास्ता नही बदलना पड़ता!


वो राह चलते लड़को पर


अभद्र टिप्पड़ियां नही करती!


वो इसलिए भी खूबसूरत होती हैं,, कि देर से घर आने वाले पति पर


शक नही करती,,


बल्कि फ़िक्र करती है!


वो छोटी छोटी बातों पर


गुस्सा नही होती,


सामान नही पटकती,


हाथ नही उठाती,


बल्कि पार्टनर को समझाने की,


भरपूर कोशिश करती हैं !


वो जुर्म सह कर भी


रिश्ते इसलिए निभा जाती हैं,,


क्योंकि वो अपने बूढ़े माँ बाप का


दिल नही तोड़ना चाहती !


वो हालात से समझौता


इसलिए भी कर जाती हैं,


क्योंकि उन्हें अपने बच्चों के


उज्ज्वल भविष्य की फ़िक्र होती है !


वो रिश्तों में जीना चाहती हैं !


रिश्ते निभाना चाहती हैं !


रिश्तों को अपनाना चाहती हैं!


दिलों को जीतना चाहती हैं !


प्यार पाना चाहती हैं !


प्यार देना चाहती हैं

औरत चाहे घर को स्वर्ग बना दे, चाहे नर्क!


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